पर्यावरण से हमें क्या शिक्षा मिलती है | Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा

पर्यावरण और प्रकृति व्यक्ति के जीवन का एक आधार है। यह व्यक्ति को सिर्फ जीने के लिए जरूरी संसाधन प्रदान नहीं करता है, बल्कि यह व्यक्ति को कई तरह की महत्वपूर्ण शिक्षा भी प्रदान करता है। पर्यावरण हमारी धरती के सभी तरह के समस्त जीवित और निर्जीव घटकों का सम्मिलित स्वरूप है। जिसमे वायु, जल, मिट्टी, जीव-जंतु, पेंड़ -पौधे, जल और मनुष्य आदि शामिल है।

वर्तमान समय में पर्यावरण की समस्या जैसे, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीवों की संख्या में कमी और घटते पेंड़ आदि सब हमारे सामने कई तरह की चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही है, जिस वजह से पर्यावरण से मिलने वाली शिक्षा व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी हो जाती है। आज हम इस ब्लॉग लेख में Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा के बारे में विस्तार से वर्णन करने वाले है। साथ ही यह भी जानेंगे की पर्यावरण से हमे क्या शिक्षा मिलती है

Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा

पर्यावरण शिक्षा से क्या आशय है?

पर्यावरण शिक्षा का उन शिक्षण प्रक्रियाओं और गतिविधियों से आशय है जिनका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील और जागरूक करना है। पर्यावरणीय शिक्षा समाज के लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जीव-जंतु बचाव, पेंड़ों के कटाव के रोकथाम, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और सतत विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देना है।

पर्यावरण शिक्षा से लोगों को पर्यावरण की समस्याओं का समाधान ही नहीं मिलता है, बल्कि उन समस्याओं को खोजने, समझने के लिए ज्ञान और कौशल में विकास भी होता है। इस तरह से प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण शिक्षा को समझते हुए समाज में जिम्मेदार नागरिक और पर्यावरण-संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करने का प्रयास भी करता है।

पर्यावरण शिक्षा से क्या समझते हैं

पर्यावरण शिक्षा का उन सभी शिक्षण और जागरूक लोगों से तात्पर्य है, जिनका उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित करना है। पर्यावरण शिक्षा से हम कई निम्न तरह के महत्व जान सकते है।

Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा

  • लोगों को पर्यावरण की समस्या और उसके समाधान प्रति लोगों को जागरूक करना व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए।
  • पर्यावरण की संरचना, कार्यप्रणाली और उससे मिलते-जुलते मुद्दों के बारे में व्यक्ति को जानकारी प्रदान करना चाहिए।
  • प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरणीय समस्या जैसे, हवा प्रदूषण, जल प्रदूषण और जलवायु प्रदूषण आदि के बारे में समझ होनी चाहिए।
  • पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों के स्थायी उपयोग और उसके संरक्षण के बारे में समझना चाहिए।
  • समाज के लोगों को व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर पर्यावरण-संवेदनशील जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करना चाहिए।
  • समाज में सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के लोगों के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए।
  • व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  • पर्यावरण की नीतियों और उनकी योजनाओं के बारे में प्रत्येक व्यक्ति को समझना चाहिए।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहिए।

पर्यावरण शिक्षा से क्या तात्पर्य है

पर्यावरण शिक्षा का तात्पर्य उन सभी प्रत्येक शिक्षण और जागरूकता गतिविधियों से है, जिनका लक्ष्य समाज के लोगों को पर्यावरण और उसके बचाव के महत्व के बारे में जानकरी प्रदान करना है। इसका लक्ष्य समाज के लोगों में पर्यावरण के मुद्दों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदारी का विकास करना है। स्कूल और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से छात्रों को पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के बारे में समझाया जाता है, जैसे प्रदूषण की रोकथाम, जलवायु परिवर्तन, जीव-जंतु संरक्षण, वन्य संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक प्रयोग आदि।

छात्रों को यह शिक्षा सिर्फ पर्यावरण की समस्या को दूर करने में मदद नहीं करती है, बल्कि उनके समाधान के लिए जरूरी ज्ञान और कौशल प्रदान भी करती है। ऐसे में पर्यावरण शिक्षा का एक उद्देश्य यह भी है कि ऐसे समाज का निर्माण हो जो पर्यावरण के प्रति जागरूक हो और उसके सतत विकास के लिए अपना पूरा योगदान दे सकें।

Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा

प्रकृति और पर्यावरण से व्यक्ति का शुरुआत से ही लगाव रहा है। प्रकृति और पर्यावरण व्यक्ति को बहुत कुछ सिखाती और प्रदान करती है। पर्यावरण से मनुष्य को सिर्फ शिक्षा ही नहीं मिलती है, बल्कि अनेकों महत्वपूर्ण आवश्यक संसाधन भी प्रदान करता करता है। पर्यावरण हमारी पृथ्वी के लिए सभी जीव-जंतु, मानव विकास और निर्जीव घटकों के लिए सम्मिलित स्वरूप है। पर्यावरण से मिलने वाली शिक्षा कुछ प्रकार से है।

Environment से मिलने वाली 5 शिक्षा

1. जीवन की एकता और संतुलन (Unity and Balance of Life)

पर्यावरण व्यक्ति को जीवन में एकता और संतुलन बनाए रखने की शिक्षा प्रदान करता है। हमारी प्रकृति के सभी घटक आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए होते है और निर्भर भी होते है। इसी आपसी निर्भरता और सहयोग से जीवन का चक्र चलता है, जैसे पेंड़ और पौधे सूर्य की ऊर्जा से अपना भोजन प्राप्त करते है और पृथ्वी वातावरण को ऑक्सीजन प्रदान करते है, जिससे मनुष्य और जीव-जंतु साँस ले पाते है। यह प्रक्रिया हमे यह सिखाती है कि पृथ्वी पर सभी जीव और मनुष्य उनके पर्यावरण एक दूसरे से संतुलन बनाए रखते है।

2. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Natural Resources)

पर्यावरण हमे यह शिक्षा देती है कि अपने अपने प्राकृतिक संसाधनों संरक्षण करना चाहिए। प्रकृति प्रत्येक व्यक्ति को यह दिखाती है कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों संतुलित और संतोषजनक उपयोग करना चाहिए जैसे, वन्य जंगलों में पेड़ तथा पौधे अपने जरूरत के अनुसार उपलब्ध जल और पोषक तत्वों का सही प्रयोग करते है। उसी तरह से मनुष्यों को भी जल, भोजन और ऊर्जा अँसुअर ही करना चाहिए और उसे व्यर्थ करने से बचना चाहिए ताकि आने वाले समय में बाकि के लोगों के लिए संरक्षण किया जा सके।

3. अनुकूलन और बदलाव की क्षमता (Ability to Adapt and Change)

पर्यावरण हमे अनुकूलन और बदलाव की क्षमता के बारे में शिक्षा देती है। इस प्राकृतिक दुनिया में परिस्थितियों में निरंतर बदलाव होते रहते है और जीव-जंतु को इन होने वाले बदलाव के अँसुअर खुद को अनुकूलित करना पड़ता है, जैसे धरती के कई जीव और जंतुओं ने अपने शरीर के आकर तथा सहने की क्षमता को विभिन्न जलायु परिस्थितियों में खुद को अनुकूलित कर लिया है।

इससे यह शिक्षा मिलती है कि हम मनुष्यों को भी बदलते समय के साथ खुद को अनुकूलित करने और परिस्थितियों को मद्दे नजर रखते हुए बदलाव करने की क्षमता को विकसित कर लेना चाहिए।

4. परस्पर सहयोग और सामूहिकता (Mutual Cooperation and Collectivity)

पर्यावरण हमे यह शिक्षा देती है कि प्रकृति में विभिन्न जीव-जंतुओं के बीच परस्पर सहयोग और समूहिकता बनाए रखना चाहिए। इसमें एक परिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न जीव और जंतु एक दूसरे के प्रति पूरा सहयोग करते है और अपने सामूहिक रूप से जीवन को संभव बनाते है।

जैसे, मधुमक्खियां पेंड के फूलों का परागण करती है और इस प्रक्रिया में मधुमक्खियां फूल के पौधों की प्रजनन करने की क्षमता को बढ़ाती है। इसी प्रकार चींटियां भी एक समूह बनाकर कार्य करती है और अपने समूह के लिए भोजन की व्यवस्था करती है। इससे हमे यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को अपने समाज में सामूहिकता और परस्पर को महत्व देना चाहिए।

5. सादगी और स्वाभाविकता (Simplicity and Naturalness)

प्रकृति में हमे स्वाभिकता और सादगी व्यक्ति को सिखाती है कि जीवन को सरल और स्वाभाविक तरीके से कैसे जीना चाहिए। व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखना चाहिए और जीवन को सटल बनाने से खुद को बचाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सुख और शांति प्राप्त करने के लिए सादगी और स्वाभाविकता को अपनाना चाहिए।

6. संतुलन और सद्भाव (Balance and Harmony)

पर्यावरण से हमें संतुलन और सद्भाव के बारे में शिक्षा मिलती है। यह हमे यह सिखाती है कि प्रकृति में सब कुछ पहले से संतुलित होता और हर जीव-जंतु तथा तत्व सब की एक भूमिका होती है। व्यक्ति को भी यह समझना चाहिए कि जीवन में संतुलन और सद्भाव बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमे अपने प्रत्येक कार्यों, संबंधों और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना चाहिए।

इसे भी पढ़ें : पर्यावरण शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या हैं

7. विविधता (Biodiversity)

पर्यावरण से हमे यह शिक्षा मिलती है कि विविधता में ही शक्ति होती है। जैव विविधता परिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित करती है। कई विभिन्न प्रजातियों के बीच का अंतर् और अनूठी भूमिकाएं पूरे तंत्र को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखती है। इसीलिए व्यक्ति को अपनी उद्योग, खेती, कृषि और अन्य गतिविधियों में विविधिता बनाकर रखने का प्रयास करना चाहिए

निष्कर्ष

पर्यावरण से हमे कई महत्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त होती है जो व्यक्ति के जीवन को समृद्ध और संतुलित बनाती है। हमे पर्यावरण से परस्पर सहयोग और सामूहिकता, स्थिरता और निरंतरता, धैर्य और समय का मूल्य, संतुलन और सद्भाव, सादगी और स्वाभाविकता, जीवन की एकता और संतुलन और सहिष्णुता और धैर्य जैसी शिक्षा मिलती है। पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण के लिए हमे इन शिक्षाओं को जीवन में जरूर अपनाना चाहिए।

इस ब्लॉग के लेख में हमने जाना है कि पर्यावरण से हमे क्या शिक्षा मिलती है, इसके लिए हमने लेख में कई तरह के तथ्यों के बारे में वर्णन किया है। हमे आशा है कि यह लेख आपके लिए जरूर उपयोगी रहा होगा और आपको पर्यावरण से मिलने वाली शिक्षा के बारे में भी समझ आया होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQS

पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य क्या है?

पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य समाज के लोगों को पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

जिम्मेदारी और जवाबदेही की शिक्षा पर्यावरण से कैसे मिलती है?

पर्यावरण की सुरक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए की प्रत्येक कार्य में पर्यावरण पर प्रभाव जरूर पड़ता है। इसलिए इसको सुरक्षित रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

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